श्री हरिदास अनन्य जै, वर विहार-रस केलि

Siddhant Ki Sakhi — श्री ललित किशोरी देव

Verse 88 of 102

रूप सनातन ब्रज कह्यौ, वृंदावन हरिवंस। श्री हरिदास बिहार मैं, रसिक करत परसंस॥ - श्री रूप सखी, सिद्धांत के दोहा (55) रूप सनातन ब्रज कहयौ, वृन्दावन हरिवंश। श्री हरिदास बिहार मैं, रसिक करत परसन.. - श्री रूप साखी, सिद्धांत के दोहे (55)
श्री हरिदास अनन्य जै, वर विहार-रस केलिश्री हरिदास अनन्य जै, वर विहार-रस केलि