श्री हरिदास अनन्य जै, वर विहार-रस केलि

Siddhant Ki Sakhi — श्री ललित किशोरी देव

Verse 89 of 102

श्री हरिदास अनन्य जे, जिनकै प्रेम प्रधान। प्यारी-पिय निजु सखिनि की, रूप माधुरी पान॥ - श्री रूप सखी, सिद्धांत के दोहा (31) श्री हरिदास दूसरे हैं जिनका प्रेम प्राथमिक है। श्री रूप सखी, सिद्धांत के दोहे (31)
श्री हरिदास अनन्य जै, वर विहार-रस केलिश्री हरिदास अनन्य जै, वर विहार-रस केलि