श्री हरिदास अनन्य जै, वर विहार-रस केलि

Siddhant Ki Sakhi — श्री ललित किशोरी देव

Verse 91 of 102

श्री स्वामी हरिदास को, अनुगत जो जन होई। नित्यविहार निरखै सदा, सखी तन रूप समोई॥ - श्री रूप सखी, सिद्धांत के दोहा (4) श्री स्वामी हरिदास को, जो उनके अनुयायी थे। नित्यविहार निरखै सदा, सखी तन रूप समोई.. - श्री रूप सखी, सिद्धांत के दोहे (4)
श्री हरिदास अनन्य जै, वर विहार-रस केलिश्री हरिदास अनन्य जै, वर विहार-रस केलि