श्री हरिदास अनन्य जै, वर विहार-रस केलि

Siddhant Ki Sakhi — श्री ललित किशोरी देव

Verse 93 of 102

श्री स्वामी हरिदास की, सरिवर रसिक न और। निरखै नित्यविहार सुख, सबही के सिरमौर॥ - श्री रूप सखी, सिद्धांत के दोहा (36) श्री स्वामी हरिदास का, सभी प्रेमियों और अन्य लोगों का। निरखै नित्य विहार सुख सर्व शिरोमणि.. - श्री रूप सखी, सिद्धांत के दोहे (36)
श्री हरिदास अनन्य जै, वर विहार-रस केलिश्री हरिदास अनन्य जै, वर विहार-रस केलि