श्री हरिदास अनन्य जै, वर विहार-रस केलि

Siddhant Ki Sakhi — श्री ललित किशोरी देव

Verse 94 of 102

श्री स्वामी जू के सरन नित, रूपसखी विश्राम। जुगल-केलि निरखौं सदा, श्री वृंदावन धाम॥ - श्री रूप सखी, सिद्धांत के दोहा (8) प्रतिदिन श्री स्वामी जू की शरण लें और शांति से विश्राम करें। जुगला-केलि निरखौं सदा, श्री वृन्दावन धाम.. - श्री रूप सखी के दोहे, सिद्धांत (8)
श्री हरिदास अनन्य जै, वर विहार-रस केलिश्री हरिदास अनन्य जै, वर विहार-रस केलि