जै जै श्रीबनराज हमारे

Siddhanta Pada —

Verse 16 of 63

(राग गौरी) जै जै श्रीबनराज हमारे। [1] जिनकी कृपा बिहार बिलोकयौ श्रीहरिदास सम्हारे॥ [2] छिन छिन नई नई प्रीति प्रिया की प्राननि हूँ तें प्यारे। [3] श्रीरसिकसखी अंग संग सहजही कबहूँ होत न न्यारे॥ [4] - श्री ललित किशोरी देव, श्री ललित किशोरी देव जू की वाणी, सिद्धान्त के पद (114) (राग गौरी) जय जय श्री बनराज हमारी। [1] जिनकी कृपा से श्री हरिदास ने बिहार बिलोकायु का उद्धार किया। [2] प्रीति प्रिया के प्राण हर लिये प्रिये। [3].
कुंज महल रंग हो हो होरीजै जै बिपिन बिहारी जू।