जे श्रीराधा चरन उपासी
Siddhanta Pada —
Verse 19 of 63
जे श्रीराधा चरन उपासी
तिन चरनन में निस दिन रम रे। [1]
तिन पद-कमल-प्रसाद सुखित भये
रही नाहिं कछु मन की गम रे॥ [2]
कुँवरि चरन सेवा की लाइक
कहै ‘वंशी’ सदृष्य अधम रे॥ [3]
- श्री वंशी अलि, सिद्धांत के पद (9)
मैं श्री राधा के चरण वंदन करता हूं, मैं राम के चरण प्रतिदिन वंदन करता हूं। [1] तीन शब्द - कमला-प्रसाद, मेरे मन में कोई सुख नहीं, मेरे मन में कोई दुःख नहीं.. [2] जैसी कन्या चरण की सेवा, वैसी वंशी, वैसी ही नीच.. [3] - श्री वंशी अली, सिद्धांत के पद (9)