कर्म धर्म और ज्ञान विज्ञान भक्ति न आन हृदै में आनौं।

Siddhanta Pada —

Verse 24 of 63

कर्म धर्म और ज्ञान विज्ञान भक्ति न आन हृदै में आनौं। वेद रमापति रामहिं आदि दै श्रीव्रजराजहिं कोउ जो बखानौं॥ [1] अति दुर्लभ नित्य विहार हमारे जू श्रीहरिदास प्रगट प्रवानौं। सरस सुसार विचारि बिहारिनिदासि बिना हौं विहार न जानौं॥ [2] - श्री सरस देव जी, श्री सरस देव जी की वाणी, सिद्धांत के पद (4) कर्म, धर्म और ज्ञान, विज्ञान, भक्ति और हृदय ये मनुष्य नहीं हैं। श्री व्रजराज को वेद, रमापति राम आदि कौन बता सकता है? [1] अत्यंत दुर्लभ नित्य विहार, जहां श्री हरिदास हमारे सामने आते हैं। सरस सुसर विचारी बिहारिनिदसी, मैं विहार बिन, नहि जानत।।[2] - श्री सरस देव जी, श्री सरस देव जी की वाणी, सिद्धांतों के सिद्धांत (4)
पौंढे माई लालन गिरिवरधारीको सरि करै हमारी राधा।