को सरि करै हमारी राधा।

Siddhanta Pada —

Verse 25 of 63

को सरि करै हमारी राधा। यदपि नाम महातम सेवत और वैस या रस में बाधा॥ [1] अंग संग नवलकिसोर किसोरी एक वैस रस सिंधु अगाधा। जागत अनुरागत निसिवासर लगत न नैन निमेष न आधा॥ [2] नित्यविहार अधार हमारें एक प्रेम निज नाम अराधा। श्रीबिहारीदास हरिदास बिपुलबल सब अभिलाष मिली सुखसाधा॥ [3] - श्री बिहारिन देव , श्री बिहारिन देव जी की वाणी, सिद्धांत के पद (151) हमारी राधा सबको खुश कर देगी. यदपि नाम महतम सेवत और वैस या रस पुरुष बाधा.. [1] अंग संग नवलकिशोर किशोर एक वैस रस सिंधु अघा। जगत अनुरागत निसिवासर लगत न नैन निमेष न अधा। [2] हमारा दैनिक जीवन एक ही प्रेम, व्यक्तिगत नाम, भक्ति पर आधारित है। श्री बिहारीदास हरिदास द्विपुलबल सब अभिलाष मिलि सुखसाधा.. [3] - श्री बिहारिन देव, श्री बिहारिन देव जी के वचन, सिद्धांत (151)
कर्म धर्म और ज्ञान विज्ञान भक्ति न आन हृदै में आनौं।कुँवरि किशोरी राधे सुख की रासि।