बैठत उठत चलत, श्रीकुंजबिहारी की जिकरि।

Siddhanta Pada —

Verse 3 of 63

बैठत उठत चलत, श्रीकुंजबिहारी की जिकरि। वृन्दावन में परि रहै, ना कछु द्वन्द ना फिकरि॥ - श्री ललित मोहिनी देव, श्री ललित मोहिनी देव जू की वानी, सिद्धांत के पद (31) बैठना, उठना, चलना, श्री कुंजबिहारी की जिकारी। वृन्दावन में न देवदूत हैं, न द्वन्द है, न परवाह है.. - श्री ललित मोहिनी देव, श्री ललित मोहिनी देव जू के वचन, सिद्धान्त (31)
अब जिन करो अबार लड़ैती जू, मोरी नवरिया अटकी।(सवैया)