आज सखि निरख रूप भरि नैन

Siddhanta Pada —

Verse 44 of 63

(राग विहागरौ) प्यारी जू तैं मोहि मोल लियो । तेरी कृपा मदन दल जीत्यौ, तेरो जिवायो जियो॥ [1] उमडी सैन महा मनमथ की, तैं अंधरामृत दियो । श्रीरसिकबिहारी कहत दीन ह्वै, धनि स्यामा को हियो॥ [2] - श्री रसिक देव जी, श्री रसिक देव जी की वाणी, सिद्धांत के पद (15) (राग विहागरौ) प्रिय तुम, तुमने मेरा प्यार खरीद लिया है। आपकी कृपा से मदन समूह विजयी हो, आपके जीव जीवित रहें.. [1] महा मन्मथ के उमादि सैन, आपने अंधरामृत दिया। श्री रसिका बिहारी कहते हैं, 'धनी श्यामा को होयो..'
प्रिया जू की चितवनि प्रेम की सुधारी है।राजा परजा बादशाह, सब कोउ आवै जाय।