आज सखि निरख रूप भरि नैन
Siddhanta Pada —
Verse 5 of 63
(राग विहागरौ)
बंदे श्रीवृन्दावन की भूमि।
ललित लतानि कुंदनमनि खाँची बेलि द्रुमनि रहीं झूमि॥ [1]
केलि निकुंज नागरी नागर बदनचंद कौं चूमि।
श्रीरसिक रूप दंपति छबि संपति सुरंग रंग अलि घूमि॥ [2]
- श्री रूप सखी, श्री रूप सखी जी की वाणी, सिद्धांत के पद (87)
(राग विहगरौ) बंदे, भूमि श्री वृन्दावन। ललित लतानि कुन्दनमणि खांची बेलि द्रुमनि रहिन झुमि..[1] निकुंज नागरी नगर बदनचंद को किसने चूमा? श्री रसिक रूप दानपति छबि स्नपति सुरंग रंग अली घूमी.. [2] - श्री रूप सखी, श्री रूप सखी जी के वचन, सिद्धांत (87)