श्री वृन्दावन चन्द्र जू, महाप्रेम-सुख दानि।

Siddhanta Pada —

Verse 56 of 63

श्री वृन्दावन चन्द्र जू, महाप्रेम-सुख दानि। अपनोई गुन देत हैं, ललित रंगीली बानि॥ - श्री ललित किशोरी देव, श्री ललित किशोरी देव जू की वाणी, सिद्धांत के पद (46) श्री वृन्दावन चन्द्र जू, परम प्रेम सुख के दाता। ललित की रंग-बिरंगी वाणी देती है गुण... - श्री ललित किशोरी देव, श्री ललित किशोरी देव जू की वाणी, सिद्धांत पद (46)
श्री ललिता सिखवत रस परिकर की ॥श्री वृंदावन में परि रहै, देखि बिहारी रूप।