भजि लै कुंज बिहारिनि बाल।
Siddhanta Pada —
Verse 7 of 63
भजि लै कुंज बिहारिनि बाल।
अद्भुत रूप रंग रस माती, चितवनि बंक बिसाल॥ [1]
पाई रंक निसंक अंक धन, करि राखी उर माल।
श्रीललितकिसोरी लाड लडावत, सहज सनेही ख्याल॥ [2]
- श्री ललित किशोरी देव, श्री ललित किशोरी देव जू की वाणी, सिद्धांत के पद (96)
भजि लै कुंज बिहारिणी बल। अद्भुत रूप, रंग, स्वाद, मन, बनाते समय चेतावनी। [1] पै रंक निसानक अनक धन, करि राखि उर माल। श्री ललित किशोरी संघर्ष, सहज प्रेमपूर्ण विचार.. [2] - श्री ललित किशोरी देव, श्री ललित किशोरी देव जू की वाणी, सिद्धांतों के सिद्धांत (96)