हम अहीरि कह जानईं जोग जुगुति की रीति
Sur Sagar — श्री सूरदास
Verse 10 of 92
देखौरी या मुकुट की लटकन।
रास किये निरतत राधे संग, नुपूर काँत पायल की पटकन॥ [1]
पीताम्बर छुट जात छिनहिं छिन बैजन्ती बेसर की अटकन।
सूर श्याम की या छवि ऊपर झूठो ज्ञान योग में भटकन॥ [2]
- श्री सूरदास, सूर सागर
देखौरी या मुकुट लटकन. नूपुर कांत के पायल की खनक, राधे के संग का सतत आनंद.. [1] पीतांबरा छूट जात छिनहिं छिन छिन, बैजंती की शीतलता। या शीर्ष पर लेटी सूर श्याम की छवि, ज्ञान योग में घूम रही है। [2] - श्री सूरदास, सूर सागर