हम अहीरि कह जानईं जोग जुगुति की रीति

Sur Sagar — श्री सूरदास

Verse 9 of 92

दीपक पीर न जानई, पावक परत पतंग। तनु तो तिहि ज्वाला जरयो, चित न भयो रस भंग॥ - श्री सूरदास, सूर सागर दीपक न छूटे, पारा पतंग बचे। तनु तो तिहि ज्वाला जरायो, चित एन भयो रस भंग.. - श्री सूरदास, सूर सागर
तज मन हरि विमुखन को संगहम अहीरि कह जानईं जोग जुगुति की रीति