हम अहीरि कह जानईं जोग जुगुति की रीति

Sur Sagar — श्री सूरदास

Verse 12 of 92

धनि यह वृन्दावन की रेनू, सूरदास ह्वां की सरवरि नहि, कल्पवृक्ष सुर धैनु॥ - श्री सूरदास, सूर सागर धनी, यह वृन्दावन की रेनू है, सूरदास हवन की सरवरी नहीं, कल्पवृक्ष सूर धैनु.. - श्री सूरदास, सूर सागर
हम अहीरि कह जानईं जोग जुगुति की रीतिहम अहीरि कह जानईं जोग जुगुति की रीति