हम अहीरि कह जानईं जोग जुगुति की रीति
Sur Sagar — श्री सूरदास
Verse 13 of 92
गर्भ-बास अति त्रास मैं, जहाँ न एकौ अंग।
सुनि सठ, तेरौ प्रानपति, तहँउ न छाँड़यौ संग॥
- श्री सूरदास, सूर सागर
गर्भ-बस अति त्रसा मुख्य, जहां अंग है। सुनि सथ, तेरौ प्राणपति, तहनु न छंदयौ संग.. - श्री सूरदास, सूर सागर