हरिजन संग छिनक जो होई
Sur Sagar — श्री सूरदास
Verse 15 of 92
(राग कान्हरौ)
हरिजन संग छिनक जो होई।
कोटि स्वर्गसुख कोटि मुक्ति सुख, तासम लहे न कोई॥ [1]
पूरै भाग्य पुन्य सञ्चित फल, कृष्ण कृपा है जाके।
'सूरदास' हरि जन पद महिमा, कहत भागवत ताके॥ [2]
- श्री सूरदास, सूर सागर
(राग कान्हरौ) हरिजन के साथ जो छीना-झपटी हुई। लाखों स्वर्गीय सुख हैं, लाखों मुक्त सुख हैं, उनके बराबर कोई नहीं है.. [1] संपूर्ण भाग्य अच्छे कर्मों का संयुक्त परिणाम है, कृष्ण की कृपा है। 'सूरदास' हरि जन पद महिमा, कहत भागवत टेक.. [2] - श्री सूरदास, सूर सागर