हों इन मोरन की बलिहारी
Sur Sagar — श्री सूरदास
Verse 16 of 92
(राग मल्हार)
हों इन मोरन की बलिहारी।
जिनकी सुभग चन्द्रिका माथे धरत गोवर्धन धारी॥ 1॥
बलिहारी या बंसकुल सजनी बंसी सी सकुमारी।
सुन्दर कर सोहे मोहन के नेकहू होत न न्यारी॥ 2॥
बलिहारी गुंजा की जात पर महाभाग्य की सारी।
सदां हृदय पे श्याम के छिनहु टरत न टारी॥ 3॥
बलिहारी ब्रज भूमि मनोहर कुँजन की अनुहारी।
सूरदास प्रभु नंगे पायन अनुदिन गैय्या चारी॥ 4॥
- श्री सूरदास, सूर सागर
(राग मल्हारा) मोरन की बलिहारी में मान। जिनके मस्तक पर पृथ्वी और गोवर्धन सुशोभित हैं। 1..बलिहारी या बांसकुल सजनी बांसुरी जैसी बांसुरी। सुन्दर सोकर मोहन के गुण भिन्न न होते।।2।।बलिहारी गुंजा जाति पर बड़े भाग्य की साड़ी। घर में अँधेरा है. 3. बलिहारी ब्रज भूमि सुन्दर कुंजन का मुख है। सूरदास प्रभु नग्न पायन आनुदिन गैया चारी।।4।। - श्री सूरदास, सूर सागर