हम अहीरि कह जानईं जोग जुगुति की रीति

Sur Sagar — श्री सूरदास

Verse 17 of 92

हम अहीरि कह जानईं, जोग जुगुति की रीति। नंदनंदन ब्रत छाँड़ि कै, को लिखि पूजै भीति॥ - श्री सूरदास, सूर सागर (4713.15) हम कहते हैं अहिरी जनाई, जीवन पथ। नन्दनन्दन ब्रत छन्दै कै, लिखि पूजै भीति.. - श्री सूरदास, सूर सागर (4713.15)
हों इन मोरन की बलिहारीहम अहीरि कह जानईं जोग जुगुति की रीति