हम अहीरि कह जानईं जोग जुगुति की रीति
Sur Sagar — श्री सूरदास
Verse 19 of 92
जब ते प्रीति श्याम से कीन्ही,
ता दिन तैं मेरें इन नैननि, नैकुहुँ नींद न लीन्ही।
- श्री सूरदास, सूर सागर
जब ते प्रीति श्याम से किन्हीं, ता दिन ते मेरेन इन नानानी, नैकुहुं निंद एन लिन्हि। - श्री सूरदास, सूर सागर जब से मुझे श्याम सुन्दर से प्रेम हुआ, उस दिन से आज तक मेरी ये आँखें एक क्षण के लिए भी नहीं सोयीं।