मन रे श्याम सों कर हेत

Sur Sagar — श्री सूरदास

Verse 21 of 92

(राग विहाग) झुकरही नींद श्याम के नैनन। चिबुक उठाय पिया मुख निरखत शोभा कही न जाय कछु बैनन॥ [1] आरस भरी अकुलाय अंक भर हियो सिचवत चैनन। सूर स्वामिनी चंद उजियारे सुख समुद्र लहरन बढ्यौ मैनन॥ [2] - श्री सूरदास, सूर सागर (राग विहागा) झुकराहि निंदा श्याम के नैन। चिबुक को उठाकर मुँह से पीने से अलिखित सौन्दर्य कहीं चला जाता है और कुछ बन जाता है..[1] अरस भरि अकुलाय अंक भर हियॉ सिचावत चानन। सूर स्वामिनी छंद उजियारे सुख समुद्र लहरन बधयौ मैनन।।[2] - श्री सूरदास, सूर सागर
हम अहीरि कह जानईं जोग जुगुति की रीतिहम अहीरि कह जानईं जोग जुगुति की रीति