हम अहीरि कह जानईं जोग जुगुति की रीति
Sur Sagar — श्री सूरदास
Verse 22 of 92
जो पै जिय लज्जा नहीं, कहा कहौं सौ बार।
एकहु अंक न हरि भजे, रे सठ ‘सूर’ गँवार॥
- श्री सूरदास, सूर सागर
जिन्दा हो तो शरमाओ मत, सौ बार कहो। एकहु अंक न हरि भजे, रे साथ 'सुर' गुबार.. - श्री सूरदास, सूर सागर