हम अहीरि कह जानईं जोग जुगुति की रीति

Sur Sagar — श्री सूरदास

Verse 23 of 92

जोइ भावै, सोइ करहु तुम, लता सिला द्रुम गेहु। ग्वाल गाइ को भृत करौ, मानि सत्य ब्रत एहु॥ - श्री सूरदास, सूर सागर जो भवै सोई मैं करूँ, तुम लता से गेहूँ सिलाओ। गाय को खिलाओ मनि सत्य ब्रत एहु.. - श्री सूरदास, सूर सागर
हम अहीरि कह जानईं जोग जुगुति की रीतिहम अहीरि कह जानईं जोग जुगुति की रीति