हम अहीरि कह जानईं जोग जुगुति की रीति

Sur Sagar — श्री सूरदास

Verse 24 of 92

कह जानो कहँवा मुवो, ऐसे कुमति कुमीच। हरि सों हेत बिसारिके, सुख चाहत है नीच॥ - श्री सूरदास, सूर सागर कह जानो कहनवा मुवो, ऐसे कुमति कुमिच। हरि अपने पुत्र से दुःखी हैं, वे नीचे सुख चाहते हैं.. - श्री सूरदास, सूर सागर
हम अहीरि कह जानईं जोग जुगुति की रीतिहम अहीरि कह जानईं जोग जुगुति की रीति