हम अहीरि कह जानईं जोग जुगुति की रीति

Sur Sagar — श्री सूरदास

Verse 25 of 92

करहु मोहि ब्रज रेनु, देहु वृंदावन वासा। माँगौ यहै प्रसाद, और मेरैं नहिं आसा॥ - श्री सूरदास, सूर सागर करहु मोहि ब्रज रेनू, देहु वृन्दावन वासा। आम प्रसाद है, आशा नहीं.. - श्री सूरदास, सूर सागर
हम अहीरि कह जानईं जोग जुगुति की रीतिहम अहीरि कह जानईं जोग जुगुति की रीति