मन रे श्याम सों कर हेत
Sur Sagar — श्री सूरदास
Verse 29 of 92
(राग विहाग)
मन रे श्याम सों कर हेत।
कृष्ण नाम की वार करले तो वचे तेरो खेत॥ [1]
मन सुआ तन पींजरा हो तासु बाँध्यों तेरौ हेत।
काल रूपी मझार डोले अब घड़ी तोहै लेत॥ [2]
विषय विष रस छाँड़ दे रे उतर सागर सेत।
‘सूर’ श्री गोपाल भजले गुरु बताये देत॥ [3]
- श्री सूरदास, सूर सागर
(राग विहागा) मन रे श्याम बेटा कर हेत। यदि तुम्हें कृष्ण के नाम पर दुल्हन मिलेगी, तो तुम्हें मेरे खेत मिलेंगे.. [1] मेरा मन और शरीर तुम्हारे लिए पिंजरे और बंधन हैं। कल मजहर डोले का रूप है, अब घड़ा देर है.. [2] विषय विष रस छंद दे रे उतर सागर सेट। 'सूर' श्री गोपाल भजले गुरु बताते हैं.. [3] - श्री सूरदास, सूर सागर