मेरी सुधि लीजौ हो, ब्रजराज

Sur Sagar — श्री सूरदास

Verse 31 of 92

(राग मुलतानी धनाश्री- तिताला) मेरी सुधि लीजौ हो, ब्रजराज। और नहीं जग मैं कोउ मेरौ, तुमहिं सुधारन काज॥ [1] गनिका, गीध, अजामिल तारे, सबरी औ गजराज। सूर पतित पावन करि कीजै, बाहँ गहे की लाज॥ [2] - श्री सूरदास, सूर सागर (राग मुल्तानी धनाश्री- तिताला) मुझे याद करो, ब्रजराज। और संसार में मेरे लिए कोई नहीं है, तुम ही हो जो मुझे सुधार सकते हो.. [1] वैश्य, गिद्ध, अजामिल तारे, सबरी और गजराज। सूर दास, सूर सागर
हम अहीरि कह जानईं जोग जुगुति की रीतिमुरली कौन तप तें कियौ