फूल्यो री सघन वन तामे

Sur Sagar — श्री सूरदास

Verse 36 of 92

(राग मालकोस) फूल्यो री सघन वन तामे करत री कोकिला गान। [1] चल री वृषभान नंदिनी छाँड़ि कठिन मन मान॥ [2] नव ऋतुराज आयौ री नैरैं मिलि कीजै मधु पान। [3] ‘सूरदास’ पिय को रिझाइये गाई सुनाइ मीठी तान॥ [4] - श्री सूरदास, सूर सागर (राग मालाकोसा) कोकिला फूलों के घने जंगल में गाती है। [1] आओ वृषभान नंदिनी चंदै कथिन मन मन मन.. [2] नव ऋतुराज आयु री नारायण मिलि किजै मधु पान। [3] 'सूरदास' मधुर बदन पीने वाले को भाता है.. [4] - श्री सूरदास, सूर सागर
हम अहीरि कह जानईं जोग जुगुति की रीतिराधे जु के प्रान गोवर्धन धारी