राधे जु के प्रान गोवर्धन धारी
Sur Sagar — श्री सूरदास
Verse 37 of 92
(राग बिहाग)
पिया बिन चन्द्र लग्यो दुःख दैन।
तारा गिनत गिनत हूँ हारी पलक न लागे चैन॥ [1]
कहाँ वे यमुना पुलिन मनोहर कहाँ वे सुख की रैन।
सूरदास प्रभु तिहारे दरस बिन विरहनि कूँ नहिं चैन॥ [2]
- श्री सूरदास, सूर सागर
(राग बिहागा) चाँद के बिना, उदास दिन लगता था। तारे गिन रहा हूं, पलकों को आराम नहीं मिलता.. [1] कहां हैं वो खूबसूरत यमुना पुल, कहां हैं वो खुशियों की बारिशें। सूरदास प्रभु तिहारे दरस, बिन विरह चैन नहीं। [2] - श्री सूरदास, सूर सागर