हम अहीरि कह जानईं जोग जुगुति की रीति
Sur Sagar — श्री सूरदास
Verse 38 of 92
प्रभु मेरे अवगुण चित ना धरो।
समदर्शी प्रभु नाम तिहारो, चाहो तो पार करो॥ [1]
एक लोहा पूजा मे राखत, एक घर बधिक परो।
सो दुविधा पारस नहीं देखत, कंचन करत खरो॥ [2]
एक नदिया एक नाल कहावत, मैलो नीर भरो।
जब मिलिके दोऊ एक बरन भये, सुरसरी नाम परो॥ [3]
एक माया एक ब्रह्म कहावत, सूर श्याम झगरो।
अबकी बेर मोही पार उतारो, नहि पन जात तरो॥ [4]
- श्री सूरदास, सूर सागर
प्रभु, मेरी कमियों पर ध्यान मत दो। समदर्शी प्रभु नाम तिहारो, चाहो तो पार करो.. [1] पूजा में एक लोह रखो, एक घर पार करो। तो पारस न देखिये दुविधा, कंचन खाय.. [2] नदी-नाला, कहावत गन्दा पानी भरता है। जब माइके दोउ एक बरन भये, सुरसरि नाम परो.. [3] एक माया एक ब्रह्म केवट, सूर श्याम झगरो। इस बार आकर्षण पर ध्यान दो, पान जात पर मत जाओ.. [4] - श्री सूरदास, सूर सागर