हम अहीरि कह जानईं जोग जुगुति की रीति
Sur Sagar — श्री सूरदास
Verse 39 of 92
प्राण इक द्वै कीन्हे, भक्ति-प्रीति-प्रकास!
सूर स्वामी स्वामिनी मिली, करत रंग-विलास॥
- श्री सूरदास, सूर सागर
किसी और को जीवन दो, भक्ति-प्रेम-ज्योति! सूर स्वामी स्वामिनी मिलि, करत रंग-विलास।।- श्री सूरदास, सूर सागर