हम अहीरि कह जानईं जोग जुगुति की रीति
Sur Sagar — श्री सूरदास
Verse 4 of 92
बलिहारी वृंदावन भूमिति, सुतौ भागकी सारी।
‘सूरदास' प्रभु नंगे पाइनि, दिन प्रति गैया चारी॥
- श्री सूरदास, सूर सागर
बलिहारी वृन्दावन की सारी भूमि भाग गयी। 'सूरदास' प्रभु प्रभु कौड़ी, गरीब पर गया चारी.. - श्री सूरदास, सूर सागर