हम अहीरि कह जानईं जोग जुगुति की रीति

Sur Sagar — श्री सूरदास

Verse 5 of 92

भवसागर तैं बूड़त राखै, दीपक हाथ धरे। सूर श्याम गुरु ऐसे समरथ, छिन्न में ले उधरै॥ - श्री सूरदास, सूर सागर आप हाथ में दीपक लेकर जीवन के सागर में एक बूढ़े आदमी बने रहें। सूर श्याम गुरु ऐसे सक्षम, उधार मन हैं.. - श्री सूरदास, सूर सागर
हम अहीरि कह जानईं जोग जुगुति की रीतिहम अहीरि कह जानईं जोग जुगुति की रीति