प्यारी तोहि गिरधर लाल

Sur Sagar — श्री सूरदास

Verse 42 of 92

(राग मलहार) प्यारी तोहि गिरधर लाल बुलावत। राधे राधे रटत निश वासर और नहि कछु भावत॥ [1] काम कटक मिलि हरि घेरे है नेक चैन नहिं पावत। सूरदास प्रभु सौं मिल भामिनि अंग अंग तिमिर नशावत॥ [2] - श्री सूरदास, सूर सागर (राग मलाहारा) प्यारी तोहि गिरधर लाल बुलावत। राधे-राधे रटत निश वासर तथा नहिं कुछु भवति। [1] कटक कम पाए जाते हैं, हरि मंगलमय शांति से घिरे हैं, शांति नहीं है। सूरदास प्रभु सौं मिल भामिनि अंग अंग तेमिर नशावत..[2] - श्री सूरदास, सूर सागर
हम अहीरि कह जानईं जोग जुगुति की रीतिहरिजन संग छिनक जो होई