हरिजन संग छिनक जो होई
Sur Sagar — श्री सूरदास
Verse 43 of 92
(राग कान्हरौ)
राधा मोहन करत वियारू।
एक कर थार सवारें सुंदरि एक वेष एक रूप उज्यारी॥ [1]
मधु मेवा पकवान मिठाई दंपति अति रुचि कारी।
सूरदास को जूँठन दीनी अति प्रसन्न ललिता री॥ [2]
- श्री सूरदास, सूर सागर
(राग कान्हरौ) राधा मोहन करत वियारु। एक दिन, एक सुन्दर स्त्री, एक पोशाक, एक उजला रूप... [1] शहद, सूखे मेवे, मिठाइयाँ, अमीर लोग बहुत दिलचस्प होते हैं। सूरदास ललिता री से बहुत प्रसन्न हुए.. [2] - श्री सूरदास, सूर सागर