राधे जु के प्रान गोवर्धन धारी

Sur Sagar — श्री सूरदास

Verse 44 of 92

(राग बिहाग ) राधे जु के प्रान गोवर्धन धारी॥ तरु तमाल डिंग कनक लता सी, उर लिपटाति राधिका प्यारी॥1॥ मरकत मणि नन्दलाल लाडिलो, कंचन भूषन भानु दुलारी। 'सूरदास' प्रभु प्रीति निरंतर, जोरी जुगल बने बनवारी॥2॥ - श्री सूरदास जी, सूर सागर (राग बिहाग) राधे जू के जीवन गोवर्धन धारी.. तरु तमल डिंग कनक लता सी, उर लिपटती राधिका प्यारी..1.. पन्ना मणि नंदलाल लाडिलो, कंचन भूषण भानु दुलारी. 'सूरदास' प्रभु प्रीति निरंतर, जोरी जुगल बनवारी बनवारी..2.. - श्री सूरदास जी, सूर सागर
हरिजन संग छिनक जो होईराधे तेरौ बदन बिराजत नीकौ