हम अहीरि कह जानईं जोग जुगुति की रीति
Sur Sagar — श्री सूरदास
Verse 47 of 92
रसना एक नहीं शत कोटिक, शोभा अमित अपारी।
कृष्ण भक्ति दीजै श्री राधे, सूरदास बलिहारी॥
- श्री सूरदास
रसना एक नहीं छः कोटिक हैं, शोभा अमित अपारी। कृष्ण भक्ति दीजै श्री राधे, सूरदास बलिहारी.. - श्री सूरदास