हम अहीरि कह जानईं जोग जुगुति की रीति

Sur Sagar — श्री सूरदास

Verse 48 of 92

सब रस कौ रस प्रेम है, विषयी खेलै सार। तन-मन-धन-जोबन खसै, तऊ न मानै हार॥ - श्री सूरदास, सूर सागर (325.11) सब रस, रस, रस ही प्रेम है, विषय ही सार है। तन-मन-धन-जोबन खसै, तौ न मैनि हार.. - श्री सूरदास, सूर सागर (325.11)
हम अहीरि कह जानईं जोग जुगुति की रीतिहम अहीरि कह जानईं जोग जुगुति की रीति