हम अहीरि कह जानईं जोग जुगुति की रीति
Sur Sagar — श्री सूरदास
Verse 50 of 92
सदा सँधाती अपनौ, जिय कौ जीवन-प्रान।
सु तैं बिसारयौ सहज हीं, हरि, ईश्वर भगवान॥
- श्री सूरदास, सूर सागर
अपने प्रियजनों को हमेशा याद रखें, अपना जीवन और आत्मा जिएं। तुम सहज ही भूल जाते हो, हरि, ईश्वर भगवान.. - श्री सूरदास, सूर सागर