हम अहीरि कह जानईं जोग जुगुति की रीति
Sur Sagar — श्री सूरदास
Verse 51 of 92
साँचौ निहचै प्रेम कौ, जीवन मुक्ति रसाल।
एकै निहचै प्रेम कौ, जबै मिलें गोपाल॥
- श्री सूरदास, सूर सागर (4713.26)
सांचौ निहचै प्रेम कौ, जीवन मुक्ति रसल। प्रेम की जरूरत नहीं, जब मिलें गोपाल.. - श्री सूरदास, सूर सागर (4713.26)