हम अहीरि कह जानईं जोग जुगुति की रीति

Sur Sagar — श्री सूरदास

Verse 52 of 92

श्रीमुख बानी कही, विलँब अब नैंकु न लावहु। व्रज परिक्रमा करहु, देह कौ पाप नसावहु॥ - श्री सूरदास, सूर सागर श्रीमुख बानी ने कहा, विलनाब अब नैनाकु न लवहु। मैं व्रज परिक्रमा करता हूं, शरीर पापों से मुक्त हो जाता है.. - श्री सूरदास, सूर सागर
हम अहीरि कह जानईं जोग जुगुति की रीतिहम अहीरि कह जानईं जोग जुगुति की रीति