हम अहीरि कह जानईं जोग जुगुति की रीति

Sur Sagar — श्री सूरदास

Verse 53 of 92

स्याम तन स्याम मन स्याम है हमारो धन, आठों जाम ऊधौ हमें स्याम ही सों काम है। [1] स्याम हिये स्याम जिये स्याम बिनु नाहिं तिये, आँधेकी-सी लाकरी आधार स्याम नाम है॥ [2] स्याम गति स्याम मति स्याम ही हैं प्रानपति, स्याम सुखदाई सों भलाई सोभाधाम है। [3] ऊधो तुम भए बौरे पाती लैके आए दौरे, जोग कहाँ राखैं यहाँ रोम-रोम स्याम है॥ [4] - श्री सूरदास, सूर सागर स्याम तन स्याम मन स्याम हमारा धन है, अथोन जम उधो हमेन स्याम ही बेटा काम। [1]. [3] उधो भये बौरे पति जैसे इस समय में, मन को कहां रखें, संसार का रोम-रोम यहीं है.. [4] - श्री सूरदास, सूर सागर
हम अहीरि कह जानईं जोग जुगुति की रीतिहम अहीरि कह जानईं जोग जुगुति की रीति