हम अहीरि कह जानईं जोग जुगुति की रीति
Sur Sagar — श्री सूरदास
Verse 62 of 92
वे जमुना, वे सखा हमारे, नित नव केली विहारी।
वृन्दावनकी गुल्म-लता हैं, मन-मधुकर कों प्यारी॥
- श्री सूरदास, सूर सागर (4892)
वह जमुना, वह सखी हमारी, नित्य घूमती फिरती है। वहाँ वृन्दावन की गुलमा-लता है, जो हृदय को प्यारी है.. - श्री सूरदास, सूर सागर (4892)