हम अहीरि कह जानईं जोग जुगुति की रीति
Sur Sagar — श्री सूरदास
Verse 63 of 92
वेद, पुरान, सुमृति सबैं, सुर-नर सेबत जाहि।
महा मूढ़ अज्ञान मति, क्यौं न सँभारत ताहि॥
- श्री सूरदास, सूर सागर
वेद-पुराण सुमरति सबैन, सुरा-नर सेबत जाहि। महामूर्ख अज्ञानी मन, क्यों नहीं मानता विश्वास.. - श्री सूरदास, सूर सागर