मन रे श्याम सों कर हेत

Sur Sagar — श्री सूरदास

Verse 64 of 92

(राग विहाग) वृन्दावन एक पलक जो रहिये। जन्म जन्म के पाप कटत है, कृष्ण-कृष्ण मुख गइये॥ [1] महाप्रसाद और जल जमुना को, तनक- तनक भर लइये। 'सूरदास' वैकुन्ठ मधुपुरी, भाग्य बिना नहीं पइये॥ [2] - श्री सूरदास, सूर सागर (राग विहागा) वृन्दावन, एक क्षण रुको। जन्म-जन्मान्तर के पाप मिट गये, कृष्ण-कृष्ण नष्ट हो गये। [1] महाप्रसाद तथा कण-कण जल से यमुना को भर दें। 'सूरदास' वैकुण्ठ मधुपुरी, भाग्यहीन... [2] - श्री सूरदास, सूर सागर
हम अहीरि कह जानईं जोग जुगुति की रीतिराधे तेरौ बदन बिराजत नीकौ