हम अहीरि कह जानईं जोग जुगुति की रीति
Sur Sagar — श्री सूरदास
Verse 66 of 92
वृंदावन सुख छाड़िकै, कहाँ बसे हो आइ।
गोवर्धन प्रभु छाड़िकै, उधौ पकड़े पाइ॥
- श्री सूरदास, सूर सागर
खुशियों से भरा है वृन्दावन, कहाँ बसे हो? गोवर्धन प्रभु छाड़ैकै, उधौ पकड़ै पै.. - श्री सूरदास, सूर सागर