हम अहीरि कह जानईं जोग जुगुति की रीति

Sur Sagar — श्री सूरदास

Verse 67 of 92

वृन्दावन व्रज को महत्, कापे बरनी जाई। चतुरानन पग परसिकै, लोक गयो सुख पाई॥ - श्री सूरदास, सूर सागर, दशम सकंध वृन्दावन व्रज महत्, कपे बरनि जय। चतुरानन पग परसिकाई, लोक गयो सुख पै.. - श्री सूरदास, सूर सागर, दशम संकन्द
हम अहीरि कह जानईं जोग जुगुति की रीतियह सब जानों भक्त के लच्छन