ऐसैं बसिऐ ब्रज की बीथिनि

Sur Sagar — श्री सूरदास

Verse 70 of 92

ब्रज में रहौं आन नहिं जावौं, कृपा तिहारी पाऊँ। हौं तो जनम जनम कौ जाचक, ‘सूरदास’ मेरो नांउ॥ - श्री सूरदास, सूरसागर कृपया मुझे ब्रज में ही रहने दीजिए और न जाने दीजिए। मैं हर जन्म में जन्म लेता हूं, 'सूरदास' मेरे मामा हैं.. - श्री सूरदास, सूरसागर
ऐसैं बसिऐ ब्रज की बीथिनिऐसैं बसिऐ ब्रज की बीथिनि